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मथुरापुर महाविद्यालय, मथुरापुर, प्रखण्ड – कहलगाँव, जिला – भागलपुर मथुरापुर महाविद्यालय की स्थापना 30 अगस्त, 1988 ई. को एक श्रेष्ठ शैक्षणिक उद्देश्य एवं सामाजिक उत्थान की भावना के साथ की गई थी। इस प्रतिष्ठित महाविद्यालय की स्थापना क्षेत्र के विद्वान शिक्षाविदों, समाजसेवियों, शिक्षाप्रेमियों तथा दूरदर्शी बुद्धिजीवियों के सतत परिश्रम, परामर्श एवं समर्पण भाव के फलस्वरूप सम्पन्न हुई। महाविद्यालय की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य क्षेत्र की जनता, विशेषकर ग्रामीण अंचल की छात्राओं को उच्च शिक्षा से जोड़ना तथा नारी शिक्षा को मजबूती प्रदान करना रहा है। इस महत्त्वपूर्ण संस्थान की नींव तत्कालीन अध्यक्ष स्व. योगेश प्रसाद राम जी के संरक्षण में रखी गई, जो एक कुशल चिकित्सक, समाजसेवी तथा शिक्षा के प्रति पूर्णतः समर्पित व्यक्तित्व थे। उन्होंने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी साधन मानते हुए इस महाविद्यालय को एक आदर्श संस्थान के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया।

भौगोलिक दृष्टि से भी यह महाविद्यालय एक विशिष्ट स्थान पर अवस्थित है। यह शिवनारायणपुर रेलवे स्टेशन से उत्तर दिशा में लगभग 300 मीटर की दूरी पर तथा मथुरापुर बाजार मैन चौक से उत्तर दिशा में 250 मीटर की दूरी पर स्थित है। यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण, शांत और अध्ययन के लिए अत्यंत उपयुक्त है। महाविद्यालय के निकट ही पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा नदी, बटेश्वर स्थान, तथा महर्षि वशिष्ठ मुनि की तपोभूमि जैसी ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलियाँ विद्यमान हैं, जो इस संस्थान की सांस्कृतिक गरिमा को और अधिक बढ़ा देती हैं। साथ ही, यह महाविद्यालय प्राचीन काल के प्रसिद्ध ज्ञान-केन्द्र विक्रमशिला विश्वविद्यालय के निकट पूरब दिशा में कुछ दूरी पर स्थित है, जिससे इसकी शैक्षणिक पहचान और अधिक मजबूत होती है। यह महाविद्यालय पीरपैंती विधान सभा क्षेत्र का एकमात्र डिग्री महाविद्यालय है, जो पीरपैंती प्रखण्ड के 29 पंचायतों तथा कहलगाँव प्रखण्ड के 28 पंचायतों के मध्य स्थित है। यह न केवल इन क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र है, बल्कि इसका पोषक क्षेत्र भी अत्यन्त विस्तृत है। महाविद्यालय का प्रभाव झारखंड राज्य के साहिबगंज एवं गोड्डा जिलों, भागलपुर जिले के सुंदर पूर्वांचल क्षेत्र, तथा उत्तर दिशा में कटिहार जिले के बाढ़ प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्रों तक विस्तृत है।

यह महाविद्यालय क्षेत्रीय विद्यार्थियों के लिए ज्ञान का दीपस्तंभ बन चुका है, जहाँ से वे शिक्षा प्राप्त कर समाज व राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं। इस महाविद्यालय के लिए कुल 07 एकड़ 7½ डिसमिल भूमि उपलब्ध है, जिसे जनसहयोग, सामाजिक सहभागिता एवं शिक्षा के प्रति जनसमर्पण के भाव से खरीदा गया है। यह तथ्य स्वयं इस बात का परिचायक है कि यह संस्था स्थानीय जनता की आस्था, सहयोग और त्याग की उपज है। महाविद्यालय का भवन, आधुनिक उपस्कर, सुसज्जित पुस्तकालय, अध्ययन कक्षाएँ, वाचनालय एवं खेल-कूद के लिए विस्तृत मैदान इसकी अधोसंरचना को मजबूत बनाते हैं, जो विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समग्र विकास का उपयुक्त वातावरण प्रदान करते हैं। वर्तमान समय में इस महाविद्यालय की प्रशासनिक बागडोर श्री अमर कुमार जी के कुशल नेतृत्व में है, जो एक पूर्व मुखिया, समर्पित समाजसेवी तथा शिक्षाप्रेमी व्यक्तित्व के धनी हैं। साथ ही, श्री ज्वाला प्रसाद सिन्हा जी इस महाविद्यालय के सचिव पद पर कार्यरत हैं, जो शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में विख्यात हैं। इन दोनों व्यक्तित्वों के नेतृत्व में महाविद्यालय निरंतर विकास की ओर अग्रसर है और क्षेत्रीय शिक्षा के स्तर को ऊँचाई प्रदान कर रहा है।

मथुरापुर महाविद्यालय को तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर से स्थायी संबद्धता प्राप्त है और यह वर्तमान में कला तथा वाणिज्य संकाय में उच्च शिक्षा प्रदान कर रहा है। महाविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियाँ, परीक्षा प्रणाली, पाठ्यक्रम एवं अन्य सभी शैक्षणिक कार्य विश्वविद्यालय के मार्गदर्शन में संचालित होते हैं। महाविद्यालय का उद्देश्य एवं शिक्षा के प्रति शुद्ध संकल्प मथुरापुर महाविद्यालय का मूल उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से समाज के सभी वर्गों, विशेषकर ग्रामीण, पिछड़े, आर्थिक एवं सामाजिक रूप से वंचित विद्यार्थियों को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण तथा मूल्याधारित उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना है। यह संस्था नारी शिक्षा को विशेष महत्त्व देते हुए महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

यह महाविद्यालय शिक्षा को केवल डिग्री अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक उत्थान, सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण का आधार मानता है। यहाँ विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला, सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता और मानव मूल्यों की भी शिक्षा दी जाती है। शुद्ध उद्देश्य यह है कि— शिक्षा के द्वारा व्यक्ति का सर्वांगीण विकास हो, समाज में सकारात्मक परिवर्तन आए, और राष्ट्र को ऐसे नागरिक मिलें जो न केवल योग्य हों, बल्कि चरित्रवान, संवेदनशील और जिम्मेदार भी हों। मथुरापुर महाविद्यालय का यह पवित्र संकल्प है कि शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है, ताकि वह भी ज्ञान के प्रकाश से आलोकित हो सके। यही इसकी पहचान है, यही इसकी प्रेरणा है, और यही इसकी शाश्वत प्रतिबद्धता है।